Sunday, February 1, 2026

केंद्रीय बजट 2026: विकास की नई गति, क्षमता और सबका साथ

 केंद्रीय बजट 2026: विकास की नई गति, क्षमता और सबका साथ 




**AI + Skills + Women + Health + Infrastructure + Inclusion = देश की नई प्रगति**


वित्त वर्ष 2026–27 का बजट विकासोन्मुख, तकनीकी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसमें कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, युवाओं, कौशल विकास, MSME, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, औद्योगिक निवेश और रणनीतिक क्षेत्रों में बहुआयामी निवेश को प्राथमिकता दी गई है। पूंजीगत व्यय में ₹1 लाख करोड़ की वृद्धि और नई योजनाओं के माध्यम से यह बजट दीर्घकालिक समावेशी विकास को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।



किसान एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था

बजट में ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए कई उपाय किए गए हैं। एक जिला–एक उत्पाद योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को प्रशिक्षण, उत्पादन और बाजार से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण आय बढ़ेगी। नारियल, काजू, कोको, बादाम, अखरोट और चंदन जैसी उच्च-मूल्य वाली बागवानी एवं वानिकी फसलों पर विशेष ध्यान दिया गया है। AI आधारित टूल “भारत-VISTAAR” किसानों को कृषि निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा। साथ ही, जलाशयों के विकास और लोन-आधारित सब्सिडी से पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में ग्रामीण रोजगार सृजन को मजबूती मिलेगी। पूंजीगत व्यय ₹11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने से नई सड़कें, पुल और रेलवे ट्रैक बनने पर रोजगार सृजन होगा और अर्थव्यवस्था में प्राइवेट निवेश को सहारा मिलेगा।


नौकरीपेशा वर्ग

नौकरीपेशा वर्ग के लिए बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे कर प्रशासन सरल और करदाताओं के लिए सुविधाजनक रहेगा। रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समय सीमा 31 मार्च तक बढ़ाई गई है, जो प्रशासनिक लचीलापन प्रदान करती है। शिक्षा, इलाज और विदेशी यात्राओं पर TCS दर को 5% से घटाकर 2% करने से मध्यम वर्ग को प्रत्यक्ष राहत मिलेगी। मोबाइल, EV और सोलर उत्पादों की कीमतों में कमी से हरित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। STT में वृद्धि पूंजी बाजार में अल्पकालिक सट्टेबाजी पर नियंत्रण का संकेत देती है।


मध्यम वर्ग

मध्यम वर्ग के दृष्टिकोण से बजट प्रत्यक्ष कर राहत न देने के बावजूद सहायक है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाना सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करता है। टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में बड़े पैमाने पर शहरी विकास निवेश से आवास, रोजगार और आधारभूत संरचना में सुधार होगा, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होने की संभावना है। इसके अलावा पूंजीगत व्यय में वृद्धि और नई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अप्रत्यक्ष रूप से मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार करेंगी।


युवाओं एवं कौशल विकास

बजट में युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था के केंद्र में रखा गया है। AI, डिजिटल नॉलेज ग्रिड, AVGC कंटेंट, गेमिंग और डिजाइन संस्थानों पर जोर भारत को नॉलेज और क्रिएटिव इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर करेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञों और केयर गिवर्स के प्रशिक्षण से मानव पूंजी में दीर्घकालिक निवेश दिखाई देता है। लड़कियों के लिए छात्रावास और पर्यटन से जुड़े कौशल कार्यक्रम सामाजिक समावेशन और रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे। AVGC क्षेत्र में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता के मद्देनजर 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएंगी।


कॉर्पोरेट एवं औद्योगिक क्षेत्र

डिफेंस, सेमीकंडक्टर, बायो-फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स में भारी निवेश यह दर्शाता है कि बजट का फोकस रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर है। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और कार्गो फ्रेट नेटवर्क से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड के माध्यम से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और 40,000 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफैक्चरिंग प्रस्ताव से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, स्टील और सीमेंट के लिए 20,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।


MSME, व्यापार और हस्तशिल्प

MSME ग्रोथ फंड और सरकारी खरीद में हिस्सेदारी बढ़ाने से छोटे उद्योगों को पूंजी और बाजार दोनों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। टेक्सटाइल, हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजनाएं पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़ेंगी। नेचुरल यार्न स्कीम, रोजगार योजना और राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करेंगे।


महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक कल्याण

लखपति दीदी और शी-मार्ट्स जैसी योजनाएं महिलाओं को लाभार्थी नहीं बल्कि उद्यमी बनाने की सोच को दर्शाती हैं। यह बजट महिला-केंद्रित विकास मॉडल को सुदृढ़ करता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार और वित्तीय स्वावलंबन को बढ़ावा देगा।


बुजुर्ग, दिव्यांग और स्वास्थ्य

स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ा हुआ ध्यान, NIMHANS 2.0 की स्थापना और आयुर्वेद संस्थानों का विस्तार समग्र स्वास्थ्य नीति की ओर संकेत करता है। दिव्यांग सहारा योजना और PM दिव्यांग केंद्र सामाजिक न्याय के लक्ष्य को मजबूत करेंगे। इसके अलावा, ट्रॉमा सेंटर स्थापित करके जिला अस्पतालों की क्षमता में 50% वृद्धि की जाएगी।


पूंजीगत व्यय और निवेश

सरकार ने पूंजीगत व्यय ₹11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया है, जिससे नई सड़कें, पुल और रेलवे ट्रैक बनेगी और रोजगार सृजन होगा। इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफैक्चरिंग के लिए 40,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव, तीन रसायनिक पार्क, मेगा टेक्सटाइल पार्क और कंटेनर विनिर्माण योजना को मंजूरी। बायोफार्मा शक्ति योजना, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टर के पुनः आरंभ से आर्थिक विस्तार को बल मिलेगा।


कर नीति और वित्तीय स्थिरता

राजकोषीय घाटा 4.3% और कर्ज-जीडीपी अनुपात 55.6% रहने का अनुमान है, जिससे सरकार कम ब्याज चुकाएगी और जनहित योजनाओं पर अधिक पैसा खर्च कर सकेगी। विदेशी संपत्ति खुलासा योजना और सहकारी लाभांश आय पर तीन साल की छूट दी गई है। TCS दर में कमी (5% से 2%) शिक्षा, इलाज और विदेशी पर्यटन पर मध्यम वर्ग को राहत देती है। सरकारी वित्तीय संस्थानों का पुनर्गठन और नगर निगम बॉन्ड पर प्रोत्साहन से वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी।


डिजिटल और आर्थिक गतिविधियां

UPI लेनदेन जनवरी 2026 में 28.33 लाख करोड़ रुपये और 21.7 अरब लेनदेन के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। डिजिटल लेनदेन में वृद्धि से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और विकसित भारत के लिए बैंकिंग सुधार हेतु हाई लेवल कमेटी गठित की जाएगी।


बजट 2026–27: मुख्य हाइलाइट्स

1. इनकम टैक्स

  • स्लैब में कोई बदलाव नहीं।

  • रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए अतिरिक्त 3 महीने का समय (31 दिसंबर → 31 मार्च)।

  • नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू।

  • फॉर्म रीडिजाइन किए गए हैं ताकि आम आदमी आसानी से भर सके।


2. हेल्थ सेक्टर

  • कैंसर, हीमोफिलिया, सिकल सेल, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी 7 दुर्लभ बीमारियों की 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटाई गई

  • एडवांस कैंसर की दवाइयां सस्ती होंगी।


3. आयुर्वेद और बायोफार्मा

  • भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की योजना।

  • निवेश: ₹10,000 करोड़

  • 3 नए आयुर्वेदिक एम्स बनाए जाएंगे।

  • आयुर्वेदिक दवाइयों की टेस्टिंग के लिए नेशनल लैब्स

  • अगले 5 साल में 1 लाख हेल्थकेयर स्पेशलिस्ट तैयार होंगे।


4. गर्ल्स एजुकेशन

  • STEM शिक्षा (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) पर विशेष जोर।

  • हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल (कुल 789 जिले)।


5. महिलाओं के लिए रोजगार

  • लखपति दीदी मॉडल पर आधारित योजनाएं।

  • महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) के लिए SHE मार्ट बनाए जाएंगे।

  • महिलाओं के उत्पाद (खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प, कपड़े, स्थानीय उत्पाद) सीधे बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।


6. रेल, जलमार्ग और ग्रीन ट्रांसपोर्ट

  • 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर:

    • मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–चेन्नई, हैदराबाद–बेंगलुरु, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी, वाराणसी–सिलीगुड़ी।

  • अगले 5 सालों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग

  • बनारस और पटना में जहाज मरम्मत सुविधाएं

  • समुद्री विमान VGF योजना की शुरुआत।


7. डिफेंस सेक्टर

  • कुल बजट: ₹7,84,678 करोड़ (पिछले साल ₹6,81,210 करोड़)।

  • वृद्धि: 15.2%

  • पेंशन के लिए ₹1,71,338 करोड़।

  • विमान और एयरो इंजन के लिए ₹63,733 करोड़।

  • नौसेना बेड़े के लिए ₹25,023 करोड़।


8. खेती, पशु और मछली पालन

  • नए व्यवसायों और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर फोकस।

  • नारियल प्रोत्साहन योजना → लगभग 3 करोड़ लोगों को लाभ।

  • काजू–कोको को 2030 तक वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य।

  • भारतीय चंदन उद्योग का पुनर्स्थापन।

  • मछली पालन → 500 तालाब और अमृत सरोवर विकसित।


9. हैंडलूम और टेक्सटाइल सेक्टर

  • नेशनल हैंडलूम पॉलिसी से कारीगरों को प्रोत्साहन।

  • मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे।

  • मैन-मेड फाइबर उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

  • एडवांस्ड फाइबर के लिए टेक्नोलॉजी अपग्रेड।

  • खादी को प्रोत्साहन


समग्र मूल्यांकन

बजट 2026–27 दीर्घकालिक विकास, तकनीकी समावेशन और सामाजिक समावेशिता पर केंद्रित है। कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और MSME में निवेश, युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार, रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा, पूंजीगत व्यय में वृद्धि और डिजिटल लेनदेन में तेजी इसके प्रमुख स्तंभ हैं। वास्तविक प्रभाव क्रियान्वयन और राज्यों के सहयोग पर निर्भर करेगा।

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